15 May, 2020 – Mohit Bhati Advocate

15 May, 2020

  • नमस्कार साथियों, मेरा नाम मोहित भाटी है। मैं प्रोफेशन से  एडवोकेट, ब्लॉगर और लेखक हूं। मैं कोई सेलिब्रिटी तो नहीं हूं लेकिन फिर भी मेरे दिमाग में एक विचार आया  कि क्यों ना मैं ब्लॉग के द्वारा अपना डेली रूटीन आप लोगों के साथ सांझा किया करूं। क्योंकि जीवन में कई पल ऐसे आते हैं जोकि अविस्मरणीय होते हैं । जैसे कि बहुत सी घटनाएं दिन-प्रतिदिन हमारे जीवन में घटित होती हैं और तरह-तरह के सपने जो हमें दिखाई देते हैं। उन सपनों में से कई तो बहुत ही महत्वपूर्ण और रोचक होते हैं। लेकिन सपने उठने के घंटे 2 घंटे या 24 घंटे  के बाद ही हम भूल जाते है। और फिर हम सोचते हैं कि यार अगर हम उस सपने को लिख लेते तो कितना अच्छा होता। अपनी डायरी तो मैं रोजाना अपडेट करता ही हूं।  तो क्यों ना उसी डायरी को ब्लॉग के माध्यम से आप लोगों के साथ सांझा कर लिया करूं। दोस्तों ब्लॉग के माध्यम से अपना डेली रूटीन आप लोगों के साथ सांझा करने से मुझे कई फायदे होंगे। एक तो लिखने की आदत पड़ जाएगी और जीवन में डिसिप्लिन आएगा जोकि सभी के जीवन में सफलता की कुंजी होती है। दूसरा टाइम का सही इस्तेमाल होगा । तो चलो चलते हैं एक अविस्मरणीय/Unforgettable यात्रा पर। कृपया सभी ध्यान दे यात्रीगण अपने-अपने सामान की स्वयं जिम्मेदार होगी । जीवन बहुमूल्य है । इसका पल-पल अनमोल है । आने वाले पल का कोई भरोसा नहीं । इसलिए हमें हर पल मस्ती से जीना चाहिए । हर दिन की एक रात होती है और हर रात की एक सुबह होती है । लेकिन कितने ही लोग ऐसे होते हैं जिनके दिन की रात तो होती है। लेकिन रात की अगली सुबह उन्हे नसीब नहीं होती। जैसे कि अभी हाल ही में गुजरे दो सुपरस्टार अभिनेता इरफान खाँन और ऋषि कपूर।  इसलिए मैं सुबह उठकर सबसे पहले अपने प्रभु को धन्यवाद देता हूं कि प्रभु आपने मुझे आज फिर एक खूबसूरत सुबह के साथ यह जीवन बक्सा। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आज दिनांक 14 मई 2020 कोरोनावायरस का प्रकोप भारत सहित पूरी दुनिया में जारी है और जैसे कि मैंने ऊपर आपको बताया कि मैं एक एडवोकेट हूं। बहुत से क्लाइंट जेलों में बंद है और उनके परिवार वाले उनके लिए परेशान हैं। क्योंकि कोर्ट भी बंद है, और वह मुझे फोन कर-कर के बस यही कहते हैं कि वकील साहब कृपया कोर्ट खुलवा दीजिए। हमारे संबंधियों को छुड़वा दीजिए और मैं उन्हें एक ही जवाब देता हूं कि देखिए मेरे हाथ में कुछ नहीं है। पूरी दुनिया कोरोनावायरस के चलते लॉक डाउन हैं । और जब तक माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, जिला न्यायालय को खुलने का आदेश नहीं दे देता, तब तक कोर्ट नहीं खुलेंगे। आज सुबह साथी अधिवक्ता भाई केके भाटी और अमित भाटी जी का फोन आया और कहने लगे कि कोर्ट चलना है। मैंने उन्हें कोरोनावायरस के खतरे से अवगत कराया। लेकिन उन्होंने मुझे यह कहते हुए राजी किया की कोर्ट में भीड़ कम है, और यदि हमारे जाने से कोई व्यक्ति जेल जाने से बच जाए तो उसके घर वाले हमें दुआ देंगे। इसलिए आज कोर्ट चलते हैं। थोड़ी देर के लिए। मैंने अपनी सहमति दे दी और 1 घंटे में तैयार होकर जब मैं घर से निकलने को हुआ तो घर वालों ने कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए चिंता जाहिर की कि घर में बच्चे और बुजुर्ग दोनों हैं। चारों तरफ लॉक डाउन है। ऐसी स्थिति में कहीं नहीं जाना चाहिए। लेकिन मैंने उन्हें जैसे-तैसे समझा लिया रास्ते में पूरी सड़क सुनसान पड़ी थी। ना बंदा ना बंदे की जात। प्रकृति का कैसा खेल निराला है । कभी जनसंख्या वृद्धि को लेकर देश चिंतित था, सड़कों पर ट्रैफिक के चलते हम सब परेशान रहते थे । और हम सब की वजह से ईश्वर के बनाए हुए अन्य जीव जैसे पशु-पक्षी स्वतंत्र नहीं घूम सकते थे। आज मनुष्य अपनी ही बनाई हुई दुनिया में कैसे कैद होकर रह गया है और प्रकृति के अन्य जीव प्रकृति का आनंद उठा रहे हैं। चारों तरफ चिड़ियों की चहचहाट है। प्रकृति मुस्कुरा रही है।


Nature 

ऐसा लगता है कि प्रकृति मनुष्य के द्वारा सताए गए प्रकृति के अन्य जीवों की स्वतंत्रता से बहुत खुश है। मानो आज उसके बच्चे स्वतंत्र हो गए हो। पेड़ पौधे लहरा रहे हैं। केवल कुछ मनुष्य  ही पुलिस वालों के रूप में सड़कों पर मौजूद हैं जोकि व्यवस्था बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी हैं । अब सुबह के 11:00 बज चुके हैं और हम जिला न्यायालय सूरजपुर स्थित अपने चैंबर पर पहुंचे हैं।

चैंबर लगभग 3 महीनों से बंद है। जैसे कि मुझे छिपकली, सांप, और मेंढक आदि से बहुत डर लगता है, और मुझे यही डर सता रहा था कि चेंबर में जरूर यही चीजें मिल सकती हैं और हुआ भी यही जैसे ही अधिवक्ता साथी ने चैंबर नंबर 629 गली नंबर 15 को का सटर उठाया और अंदर एंट्री की तो सबसे पहले दो छिपकलीयों ने हमारी तरफ भागते हुए हमारा स्वागत किया । जिससे मैं बुरी तरह चिल्लाया और बाहर की तरफ भागा। लेकिन साथी अधिवक्ता ने हंसते हुए छिपकलियों को भगा दिया । आगे और भी चीजे हमारा इन्तजार कर रही थी।साथी अधिवक्ता जब साफ-सफाई करके चेयर पर बैठे तो उनकी नजर टेबल के नीचे गई। जहां एक बड़ा सा सांप इंतजार कर रहा था। उसको देख कर साथी अधिवक्ता की भी सिट्टी पिट्टी गुल हो गई और चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागे। मैं तब तक नल से पानी भरकर वापस आ रहा था। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ उन्होंने सांप के बारे में मुझे बताया। उसके बाद हमने कोर्ट में मौजूद पुलिस वाले भाइयों की मदद से किसी तरह उस सांप को उसकी मंजिल तक पहुंचा दिया

 और फिर राहत की सांस ली लगभग 12:30 बज चुके थे। हमने जमानत से संबंधित दस्तावेज तैयार किए और रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिए तथा जमानत के आदेश माननीय न्यायालय ने हमारे आग्रह पर जारी करते हुए अभियुक्त को छोड़ने के निर्देश दिए। जिसके बाद अभियुक्त के घर वालो ने हमारा एहसान माना और चले गए । उसके बाद करने को काम तो कुछ बचा नहीं था और थोड़ा थके हुए भी थे। तो मैंने सोचा क्यों ना साथी अधिवक्ता अमित भाटी चैम्बर नंबर 184 पर दिवंगत  अभिनेता  इरफान खान  की फिल्म  देखकर मनोरंजन किया जाए । इरफान खान मेरे पसंदीदा हीरो में से एक रहे हैं। जिनके करैक्टर को मैं कहीं ना कहीं अपने आप से कनेक्ट कर पाता हूं और उनके गुजर जाने का मुझे बड़ा दुख होता है । मैंने साथी अधिवक्ता को बताया की पान सिंह तोमर के बाद उनकी दूसरी सबसे अच्छी फिल्म जो मुझे लगती है।वह  राइट या रॉन्ग है और आज हम उसी को देखेंगे। हमने 5:00 बजे तक इस शानदार मूवी का मजा लिया।

मूवी का सारांश कुछ इस प्रकार है :-  

इस फिल्म में इरफान खान और सनी देओल गोवा पुलिस में इन्स्क्रिप्ट और एसीपी होते हैं और बहुत ही खास दोस्त भी होते हैं। एक एनकाउंटर के दौरान सनी देओल (अजय श्रीधर) को रीड की हड्डी में गोली लग जाती है और उनका कमर से नीचे का हिस्सा पैरालाइस हो जाता है । अब वह अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकते हैं। जिसके चलते उनको रीजाइन देना पड़ता है। जिससे उनके दोस्त इरफान खाँन (विनय पटनायक) सहमत नहीं है। अजय श्रीधर ने डॉक्टर से पूछा कि मेरे ठीक होने के चांसेस  कितने हैं ? डॉक्टर का जवाब होता है कि बहुत कम, मिलियंस में से कोई एक ठीक होता है। अजय श्रीधर अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोलते हैं कि आई एम द वन इन मिलियंस। इसके बाद अजय श्रीधर को अपनी वाइफ और अपने भाई के अफेयर्स का पता चलता है । जिससे वह अंदर से बुरी तरह टूट जाते हैं और सुसाइड करने की कोशिश करते हैं। लेकिन फिर वह अपने बेटे की वजह से ऐसा नहीं करते और अपने भाई और अपनी पत्नी के मर्डर की बड़े रोचक तरीके से पटकथा तैयार करते हैं। वो उन दोनों से कहते कि मैं मरना चाहता हूँ और दोनो को अपने मर्डर के लिए तैयार करते हैं और वे दोनों तैयार भी हो जाते हैं। लेकिन शायद उन्हे पता नही था कि अजय को मारना इतना आसान नही होगा । जिसमें सेल्फ डिफेंस में दोनों मारे जाते हैं। पुलिस द्वारा  केस को सेल्फ डिफेंस बताकर बंद कर दिया जाता है। लेकिन इरफान खाँन ( विनय पटनायक ) को शक होता है और वह अजय श्रीधर के घर भीगते हुए जाते हैं। अजय श्रीधर से सवाल पूछते हैं कि तुमने अपने भाई और पत्नी का प्लान करके मर्डर किया है। तुम पहले से ही उनके अफेयर्स के बारे में जानते थे । अजय श्रीधर  इस आरोप को नकार देते हैं और कहते हैं की मैंने उन्हें सेल डिफेंस में मारा है। विनय पटनायक कहते हैं कि देखो मुझे पता है कि तुमने प्लान करके मर्डर किया है।  It’s case of murder not self defense. और मैं तुम्हारा दोस्त हूं मुझे बता दो। लेकिन सनी देओल का वही जवाब होता है । इरफान खान सीनियर अधिकारी के पास इस बारे में अजय श्रीधर के खिलाफ जांच कमेटी गठित करने की मांग करते है। लेकिन सीनियर अधिकारी द्वारा उनसे फाइल लेकर दूसरे ऑफिसर को दे दी जाती है। फिर भी मीडिया से प्रैसर डलवा कर वह जांच कमेटी गठित करवा लेते हैं। लेकिन यह जानते हुए भी कि It’s case of murder not self defense.  अजय श्रीधर को गिल्टी साबित नहीं कर पाते। नही  । 






Hello friends, My name is Mohit Bhati.  I am a professional advocate, blogger and writer.  I am not a celebrity but still an idea came to my mind that why don’t I share my daily routine with you through a blog.  Because there are many moments in life that are unforgettable.  As many events happen in our day to day life and the variety of dreams that we see.  Many of those dreams are very important and interesting.  But we forget only after 2 hours or 24 hours after dreaming.  And then we think how good it would have been if we had written that dream.  I update my diary daily.  So why not share the same diary with you guys through a blog.  I will be benefited by sharing my daily routine with you guys through my blog. 

 One will get into the habit of writing and the discipline will come in life, which is the key to success in everyone’s life.  Second time will be used properly.  So let’s go on an unforgettable / unforgettable journey.  Please all passengers will be responsible for their own luggage.  Life is precious  Its moment-to-moment is priceless.  No confidence in the coming moment.  Therefore, we should live happily every moment.  There is a night of every day and there is a morning of every night. 

But how many people are there who have day and night.  But they have no luck in the next morning of the night.  Like two superstar actors Irfan Khan and Rishi Kapoor recently passed away.  So I wake up in the morning and first of all thank my lord that you have given me this life box with a beautiful morning again today.  Thanks a lot.  Today 14 May 2020 Coronavirus outbreak continues across the world including India and as I told you above I am an advocate.  Many of the clients are in jails and their families are worried for them.  Because the court is also closed, and he just calls me and says that lawyer sir please open the court.  Get our relatives free and I give them the same answer, see that I have nothing in my hand.  The whole world is locked down due to Coronavirus.

And until the Hon’ble High Court of Allahabad orders the District Court to open, the courts will not open.  This morning, fellow advocates Bhai KK Bhati and Amit Bhati ji got a call and said that the court has to go.  I made them aware of the danger of coronavirus.  But he persuaded me saying that there is less crowd in the court, and if someone leaves our house to go to jail, then his family will bless us.  That is why we go to court today.  For a while.  I gave my consent and when I was ready to leave the house in 1 hour, the housemates expressed concern that both the children and the elderly were in the house due to the danger of coronavirus.  There is lock down all around.  Should not go anywhere in such a situation.

But as soon as I understood them the whole road was deserted on the way.  Neither brother nor fellow  What kind of nature game is unique.  The country was once worried about population growth, we used to get upset due to traffic on the roads.  And because of all of us, other creatures made by God like animals and birds could not roam freely.  Today, how man is imprisoned in his own created world and other creatures of nature are enjoying nature.  There is a chirp of birds all around.  Nature is smiling.  It seems that nature is very happy with the freedom of other creatures of nature persecuted by humans.  As if his children have become independent today.  Trees are waving plants.  Only a few humans are present on the streets as policemen, which are very important to maintain order.  It is now 11:00 AM and we have arrived at our Chamber at District Court Surajpur.  The Chamber has been closed for about 3 months.  Like I am very afraid of lizards, snakes, and frogs etc., and I was afraid that the same things can be found in the Chamber and the same thing happened as soon as the Advocate Sate set up the Chamber Number 629 Street No. 15.  Raised and entered inside, first of all two lizards rushed towards us and welcomed us.  Due to which I screamed badly and ran out.  But fellow advocates drove the lizards away laughing.  Further things were waiting for us. When the lawyer sat on the chair cleanly, his eyes went under the table.  Where a big snake was waiting.  Seeing him, the fellow advocate also got dissatisfied and ran out screaming.  By then I was coming back from the tap.  So I asked him what happened he told me about the snake.  After that we somehow managed to get the snake to its floor with the help of the police brothers present in the court and then it was almost 12:30.  We prepared the documents related to the bail and presented it before the remand magistrate and the bail order was issued by the Honorable Court directing the release of the accused.  After which the accused’s house was our favor and went away.  There was no work left to do after that and were a bit tired too.  So I thought why not entertain fellow Advocate Amit Bhati by watching the film of the late actor Irrfan Khan on Chamber number 184.  Irrfan Khan has been one of my favorite heroes.  Whose character I am able to connect with myself somewhere and I feel very sad to pass away.  I told my fellow lawyer that after Paan Singh Tomar, his second best film which I think is right or wrong and today we will see him.  We enjoyed this great movie till 5:00 pm.

The summary of the movie is as follows: – In this film, Irrfan Khan and Sunny Deol are inscript and ACP in Goa Police and are very special friends.  During an encounter, Sunny Deol (Ajay Sridhar) gets shot in Reed’s bone and paralyzes his waist down.  He can no longer stand on his feet.  Due to which they have to design.  To which his friend Irrfan Khan (Vinay Patnaik) does not agree.  Ajay Sridhar asked the doctor how much are the chances of me recovering?  The doctor’s answer is that very few, one of the millions is cured.  Ajay Sridhar, looking at his son, says that I am the one in Millions.  After this, Ajay Sridhar gets to know his wife and his brother’s affairs.  Due to which he breaks badly inside and tries to commit suicide.  But then he does not do it because of his son and in a very interesting way he prepares the screenplay of his brother and his wife’s murder.  He would tell both of them that I want to die and prepare both of them for their murder and they both get ready.  But perhaps he did not know that it would not be so easy to kill Ajay.  In which both are killed in self-defense.  The case is closed by the police as self-defense.  But Irfan Khan (Vinay Patnaik) is suspicious and goes to Ajay Sridhar’s house.  Ajay asks Sridhar that you have murdered by planning your brother and wife.  You already knew about his affairs.  Ajay Sridhar denies the charge and says that I have killed him in cell defense.  Vinay Patnaik says, look, I know that you have planned and murdered.  It’s a case of murder not self defense.  And tell me I’m your friend.  But Sunny Deol has the same answer.  Irfan Khan demands a senior officer to set up an inquiry committee against Ajay Sridhar in this regard.  But the senior officer takes the file from them and gives it to another officer.  However, after getting the pressured by the media, they get the inquiry committee constituted.  But knowing that it’s a case of murder not self defense.  Ajay is unable to prove Sridhar to be gilty .
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