The God of cricket 🏏 is the biggest example for us.

 इस दुनिया मे सबकुछ मिल सकता है,बस पाने की जिद होनी चाहिए। 

The God of cricket 🏏 is the biggest example for us.

यह बात सच है कि किस्मत भी बहादुरो का साथ देती है। सचिन पाजी की बहादुरी के किस्से तो बहुत है लेकिन 2003 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ दुनिया के सबसे खतरनाक वसीम अकरम, वकार यूनुस और रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अक्खतर जैसे तेज गेंदबाजों के सामने वो 98 रनो की अविस्मरणीय पारी भूलाऐ नही भूलती। उस समय स्थिति कुछ ऐसी ही थी जैसे कि कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत युद्ध के समय पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित विशाल सेनाएं एक दूसरे के सम्मुख खडी हुई है। कौरवो की विशालकाय सेना में दुर्योधन, पितामह भीष्म, पांडवों और कौरवों के गुरू द्रोणाचार्य, अजर अमर द्रोण पुत्र अश्वत्थामा, कुल गुरू कृपाचार्य और कुण्डल कवच धारी और अर्जुन के समान महारथी कर्ण जैसे तमाम योद्धा मौजूद थे,जिनसे शायद देवता भी लडने का साहस ना कर पाते। 

दुसरी तरफ पाण्डव सेना और उनके तमाम योद्धा पाण्डवों की जीत की एकमात्र उम्मीद महारथी अर्जुन की तरफ आस लगाए देख रही है। महारथी अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से गीता के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर शस्त्र उठाए और अकेले ही उस विध्वंसक युद्ध में कौरव वंश का अन्त कर दिया। उसी तरह सचिन पाजी ने पाकिस्तान की तरफ से पारी का दूसरा ओवर फेंकने आए रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अक्खतर के पहले ही ओवर में अपर कट से लगाए गए छक्के सहित कुल 18 रन ठोंककर विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी। उस मैच में सचिन तेंदुलकर ने 75 गेंदो मे 98 रन की अविस्मरणीय पारी खेलकर पाकिस्तान को चारो खाने चित कर दिया। बाकी सब इतिहास में दर्ज है।

कहते है जब बादलो मे बिजली गरजता तो सभी पक्षी अपने-अपने घोषलो में चले जाते है लेकिन बाज अपने आपको बादलो से ऊपर ले जाता है। सचिन तेंदुलकर वही है।

The right to life is above the right to kill and the right to eat cow-beef can never be considered a fundamental right Allahabad High Court

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